बालकवि बैरागी मालवा के युग पुरुष



मालवा के युग पुरुष  बालकवि बैरागी

मालवा के युग पुरूष और मालवी भाषा/ बोली के जनक और कद्दावर कवि  दादा बालकवि  बैरागी जी इस तरह विदा हो जायेगे लगता ही नहीं १३ मई २०१८ उन्होंने अंतिम सांस ली | इस उम्र में भी मंच पर कविता पढना और सफर कर अक्सर इंदौर आना उन जैसे गहन गंभीर व्यक्ति के लिए ही सम्भव था |दादा बैरागी मंचो के कवि तो थे ही साथ ही एक कुशल राजनितिज्ञ  और कुशल वक्ता भी  थे उन्होंने  लोकसभा ,राज्यसभा और विधान सभा तीनो में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया | मालवी कविताओ में उनका श्रृंगार,वीर और करुण रस में गीतों से लोगो को मोहित सा कर लिया था | उनकी “पणहारी “ सुनने के लिए लोग पूरी रात बेठे रहते थे | उनका “आई जावो मैदान में” ओज गीत और “चटक म्हारा चंपा “ भी  काफी पसंद किया गया | “देश म्हारो बदल्यो रे देश म्हारो बदल्यो “ गीत को काफी सुना गया | “उतारू थारा वारण ए म्ह्रारा कामनगारा की याद” सोंदर्य का वर्णन आज भी लोगो को याद हे |लता मंगेशकर ने उनका गीत "तू चंदा में चांदनी तू तरवार की शाख रे" गाया जो काफी मशहूर हुवा  और आज भी लोगो की जबान पर हे |उनकी कविता की अंतिम लाइने सभी याद कर रहे हे की "चाहे सारे सुमन बिक जाए ,अपनी गंध नहीं बेचूंगा"|

दादा बालकवि बेरागी जी के वरद हस्त से "पचरंगो मुकुट " की कल्पना हुई | मै एक छोटा मोटा लेखक और कुछ कविताओ की  एक पांडुलिपि लेकर दादा को भेजी  और प्रार्थना करी  की दादा आप इस किताब की भूमिका लिख दो ,पहले तो मुझे लगा इतने बड़े आदमी को में क्या कह रहा हु पर दादा के  सीधा सादा स्वभाव  के आगे में नत मस्तक हो गया की उन्होंने मेरी पुस्तक की भूमिका न सिर्फ अपने हाथो से लिखी साथ ही पुस्तक का नामकरण भी “मालवा का माथा पे पचरंगो मुकुट “ किया |अपने पत्र में लिखा की “ आपकी पुस्तक पर म्हारा प्रष्ठ संलग्न हे काम का वे तो छापजो नितर फाड़ी ने फेकी दीजो “ अपने इतने महत्वपूर्ण आशीर्वाद  को देने का उनका अपना तरीका था |  मेरे मित्र श्री राशिनकर जी ने मेरी उनसे सिफारिश की और उन्होंने उनकी बात मानी और पचरंगो मुकुट को उन्होंने होटल के कमरे में ही आशीर्वाद दिया क्योकि वो बार बार इंदौर सफर नहीं कर सकते थे | उसके बाद हर महीने दो महीने में उनका फोन ऐसे आता था जैसे वे मुझे बरसो से जानते हो |आज भी फोन की घंटी बजती हे तो लगता हे दादा का फोन होगा |  आज दादा नहीं हे पर मेरी पुस्तक "पचरंगो मुकुट "के प्रथम प्रष्ठ पर वे हमेशा जिन्दा रहेगे और मेरा मार्गदर्शन करेंगे | मै “पचरंगो मालवो ग्रुप” और “मालवी जाजम “ की और से ईश्वर से प्रार्थना करता हु की उनको अपने धाम में वास दे और उनकी आत्मा को  चिर शांति प्रदान करे |   
 
राजेश भंडारी “बाबु”
९००९५०२७३४

Comments